चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार को गवर्नमेंट ऑफ़ पंजाब की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सिसवां क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई में हुई देरी पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यह क्षेत्र डीलिस्टेड फॉरेस्ट लैंड के रूप में अधिसूचित है, जहां किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि पर प्रतिबंध है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अदालत ने यह जानना चाहा कि वर्षों से मामला लंबित रहने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वर्ष 2023 में करीब 190 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उसके बाद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित क्षेत्र वन क्षेत्र नहीं है, बल्कि डीलिस्टेड फॉरेस्ट श्रेणी में आता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यहां कुछ प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।
अदालत ने मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने के लिए हलफनामा मांगा है कि जिन क्षेत्रों को डीलिस्ट किया गया था, उनके लिए अधिसूचना में जो शर्तें तय की गई थीं, उनका पालन किया जा रहा है या नहीं। इस मामले में विस्तृत आदेश अभी जारी किया जाना बाकी है।
दरअसल, यह मामला एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिसवां इलाके में नियमों का उल्लंघन कर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाए जा रहे हैं और प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। मार्च 2025 में पहली बार यह मामला अदालत के सामने आया था, जब आरोप लगा था कि डीलिस्टेड फॉरेस्ट भूमि पर बिना अनुमति एक रेस्टोरेंट बना दिया गया।
बाद में कोर्ट ने मामले का दायरा दर्ज किए हुए सिसवां और मोहाली जिले के आसपास स्थित अन्य बस्तियों की जानकारी भी बताई। शिवालिक हिल्स की तलहटी में स्थित इस इलाके में चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के कई प्रभावशाली लोगों के फार्महाउस भी मौजूद बताए जाते हैं।